MY ANCHORING SPEECH AT THE SCHOOL FUNCTION

Hello all!!

I was selected to anchor my school’s STORY TELLING COMPETITION IN HINDI. The competition was held on Friday, 23 July 2010. Here I present my anchoring speech. Do read it and leave your comments. Thanks!!

आदरणीय प्रधानाचार्याजी, शिक्षकगण और मेरे प्यारे मित्रों| आप सब को मेरा नमस्कार| आज हमारे उपस्थित होने का मुख्य उदेश्य है कि कुछ सिखना जो हम कहानी के माध्यम से करेंगे| कहानी भाषा कि वह शक्ति है जो इन्सान को जीने कि कला और कुछ बनने की चाह दिखाती है|

“कह नानी, कह नानी,

कहते कहते बनी कहानी”

तो आइये आज इसी उदेश्य को परिपूर्ण करने के लिये बुलाते हैं,” केविन शाह|”

धन्यवाद केविन

सुना और समझा आपने कि अपने हक को कैसे लिया जाता हैं?|

अब आ रही हैं “आशना शाह” जो हमें कहानी के माध्यम से अच्छे और बुरे की पहचान कराऐंगी|

धन्यवाद आशना

गोपियों को मोहित करने के लिये कृष्ण भगवान बांसुरी बजाते थे| ऐसे ही चूहों और बच्चों को मोहित करता है बांसुरीवाला|

तो आए सुनते हैं बांसुरीवाले की कहानी “मेहता मिली” के शब्दों में|

धन्यवाद मिली

अब कहानी की रोचकता को बढाते हुऐ “शाह जस” सुरकन्या, एक चिडिया की कहानी सुनाऐंगे|

धन्यवाद जस

अब हमारे सामने “रन्का सय्यम” तीन पुतलियों की कहानी सुनाऐंगे|

धन्यवाद सय्यम…..

आप को पता है जानवरों में सबसे तेज़ खरगोश भागता है और बहुत चतूर भी होता है तो हमें खरगोश की चतूराई बताते हुऐ “शाह मोक्षा” कहानी सुनाऐंगी|

धन्यवाद मोक्षा

अब अगले जानवर की कहानी आ रही है “मेहता देवांशी|”

धन्यवाद देवांशी

दीप छोटा सा होकर भी हमें रोशन करता है, तो इसी दीप की कहानी आ रहें है “उपध्या श्लोक|”

धन्यवाद श्लोक…..

अब चालाक चिडिया की कहानी सुनाने आ रही है “सलोत श्रुति|”

धन्यवाद श्रुति

आपने अभी सुना की चिडिया चालाक होती है, पर क्या मुर्गा चालाक होता है? हां, मुर्गा भी चालाक होता है| तो चालाक मुर्गे की कहानी सुनाने आ रहीं है,”शाह अचीरा|”

धन्यवाद अचीरा

आप को पता है, लालच का फल सदा ही बुरा होता है| हमें कभी भी लालच नही करनी चाहिये| यह सिख देने आ रही है, “शाह ईशा|”

धन्यवाद ईशा

पानी जीवन के लिये अनिवार्य है| अगर पानी न हो तो जीवन न हो| इसी पानी के महत्व को समजाने के लिये “सिंघानिया द्रष्टि” प्यासा कौआ की कहानी सुनाऐंगी|

धन्यवाद द्रष्टि

अब मैं “अचीरा” से कहता हूं कि वे आकर जजसाहेबा को धन्यवाद करें और उन्हें हम सब की तरफ़ से उनका तोहफा उन्हें दें|

अब मैं जजसाहेबा से कहता हूं कि वे स्टेज पर आकर दो शब्द कहकर जाए|

अंत में मैं प्रधानाचार्याजी को धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने अपना अनमोल समय हमें दिया| और मैं अपने सहपाठीयों को भी धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने कहानी के माध्यम से हमें अनेक प्रकार की सीख दी… धन्यवाद…

जय हिंद , जय भारत

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